Monday, 10 June 2013

" तेरी आँखेँ "






असर जो तेरी आँखोँ का यूँ हुआ मुझ पर,

हर लम्हेँ को कैद करना चाहा मैँने,
प्यारी सी मुस्कान से लेकर खूबसूरत उदासी तक,
तेरी हर अदा पर फिदा हो जाना चाहा मैँने,



नज़रोँ को तूने जो उठाया ऐसे,
कि हर ग़ालिब घायल हो गया,
नज़र-अंदाज़ ना कर सका मैँ उन नज़रोँ को,
और खुदा का यह बंदा भी ग़ालिब बन गया,


तेरी आँखोँ मेँ काजल की वो लकीर,
काले बादलोँ से भी गेहरी थी,
माथे पर थी वो लाल बिँदी,
जिसकी चमक सोने से भी सुन्हरी थी,


कान के झुमके तेरे ऐसे,
रंगीन जैसे मोर के पँख,
छन छनाने कि उन्की आवाज़,
सुनके समा गया मेरा तुझमे कन कन,


प्यारी सी थी तेरी नाक कि नथिनी,
जैसे शगुन का काला टीका,
और ऐसा दीवाना बनाया इन सब ने मुझे,
कि अब सारा सँसार लगने लगा है फीका,






फिर भी एक जगह से नहीँ हटी मेरी नज़र,
और वो थी तेरी खूबसूरत आँखेँ,
असर जो तेरी आँखोँ का यूँ हुआ मुझ पर,
हर लम्हेँ को कैद करना चाहा मैँने...



- tawanug



I am going places.

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